Friday, February 20, 2026

ग्रामोफोन रिकार्ड

ओशो की किसी किताब में पढ़ा था.

मैं तुम्हें तुम्हारा पता नहीं दे सकता
मुझे मेरा पता है 
और कैसे मुझे मेरा पता लगा 
इसकी विधि जरूर तुमसे कह सकता हूं 
कैसे मैने खोदा अपना कुआं 
कैसे पाया अपना जल स्रोत 
उसकी विधि तुमसे कह सकता हूं 
उस विधि को भी जड़ता से मत पकड़ लेना 
नहीं तो चूक हो जाएगी 
यह मामला नाजुक है 
नाजुक इसलिए है कि 
दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते 
दो व्यक्तियों के भीतर का 
नक्शा भी एक जैसा नहीं होता 
लेकिन इशारों को तुम 
नक्शे मत मान लेना 
इस दुनिया में कोई नक्शा नहीं है 
आत्मज्ञान का 
हाँ बहुत लोगों ने- 
बुद्धों ने- इंगित किए हैं
इंगित का अर्थ ही 
यह होता है कि समझो 
फिर समझ पूर्वक 
अपने अनुकूल डालो 
प्रत्येक व्यक्ति को 
अपने धर्म की तलाश करनी होती है 
और जो लोग मानकर बैठ जाते हैं- 
हिंदू मुस्लिम जैन इसाई
वे चूक जाते हैं
वे सोचते हैं कि मिल गई बाइबल 
मिल गया कुरान मिल गए वेद 
अब और क्या करना है 
इनको कंठस्थित 
करें ग्रामोफोन रिकॉर्ड हो जाओगे 
रटंते तोते बन जाओगे
खुद का पता ना मिलेगा...

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