Wednesday, March 11, 2026

From My old Diary

जब मै कालेज में था तब डायरी लिखा करता था...
कुछ जो दिल को छु जाता था उसे नोट कर लिया करता था
 
There are two ways to live your life one is as though nothing is a miracle. 
The other is as though everything is a miracle.

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं 
जिसको देखा ही नहीं उसको खुद कहते हैं

जिंदगी तुझसे हर एक सांस पर समझौता करूं शौक जीने का है मुझको मगर इतना तो नहीं

खामोशी की मौत गवारा नहीं मुझको 
शीशा हूं टूट कर भी खाना छोड़ जाऊंगा

हजूमे गम मेरी फितरत बदल नहीं सकते 
क्या करूं मुझे आदत है मुस्कुराने की

मिली हवाओं में उड़ने की वह सजा यारो 
कि मैं जमीन के रिश्तो से कट गया यारों

कभी-कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है 
जिन बातों को खुद ना समझे औरों को समझाया है

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल को खुश रखने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है

दिल दे तो इस मिजाज का परवरदिगार दे 
जो गम की घड़ी को भी खुशी में गुजरते

न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता 
डुबोया मुझको होने ने, ना होता मैं तो क्या होता

जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे 
कि बारिशों में पतंग उड़ाया करो

अपने गम को किसी और को दिखाया न जाए घर पर ही बिखरी हुई चीजों को सजाया जाए

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो 
जिंदगी क्या है किताबों को हटाकर देखो

दिल भी जिद पे अदा है किसी बच्चे की तरह या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नहीं

जब भी किसी से कोई गिला रखना 
सामने अपने आईना रखना

ऐ खुदा रेत के सेहारा को समंदर करते 
या छलकती हुई आंखों को भी पत्थर कर दे

चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले 
कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले

क़हकहा आंखों का बर्ताव बदल देता है 
हंसने वाले तुझे आंसू नजर आए कैसे

सच घटे या बड़े तो सच ना रहे 
झूठ की तो कोई इंतहा ही नहीं

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता है आसान 
हम जब थक कर रुक जाएंगे औरों को समझाएंगे

खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे 
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी 
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी

औरों को हंसते देखो मनु 
हँसो और सुख पाओ 
अपने सुख को विस्तृत कर लो 
सबको सुखी बनाओ

उन्हें यह ज़िद कि मुझे देख कर किसी को ना देख 
मेरा यह शौंक की सबसे कलम करता चलूँ

वह मेरे सामने गया और मैं 
रास्ते की तरह देखता रह गया

मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है 
क्या मेरे हक में फैसला देगा

आखरी हिचकी तेरी बाहों में आए 
मौत भी मैं शायराना चाहता हूं

कारगर मेरी दुआ हो यह जरूरी तो नहीं,
मैं जो मांगू वह आता हो यह जरूरी तो नहीं. शेख करता तो है मस्जिद में खुद को सजदे, उसके दिल में भी खुदा हो यह जरूरी तो नहीं. खामोशी भी तो बाअंदाजे गिला होती है, शिकवा होठों से अदा हो यह जरूरी तो नहीं. इश्क ने साज ए मोहब्बत पर गजल छेड़ी है 
हुस्न भी नगमा ए सरा हो यह जरूरी तो नहीं. तीराबख्ती में भी जीने का मजा है मंजर, 
ऐश ही जुज्बे बका हो यह जरूरी तो नहीं.

तीराबख्ती- तकलीफ
जुज्बे बका- चिरस्थायी
नगमा ए सरा- संपूर्ण गीत

I do not love you, 
for
What you are
But for
What I am with you...

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहां होता है सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला

मेरी आवाज ही पर्दा है मेरे चेहरे का 
मैं हूं ख़ामोश जहां मुझको वहां से सुनिए

कोई हाथ भी ना मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से 
यह नए मिज़ाज का शहर है जरा मिला करो फासले से

कोई देता है दिल को मुसलसल आवाज; 
और फिर अपनी ही आवाज से घबराता है.
अपने बदले हुए अंदाज का एहसास नहीं; 
मेरे बहके हुए अंदाज से घबराता है.
राज को है किसी हमराज की मुद्दत से तलाश; और दिल है कि सोहबते हमराज से घबराता है. शौक यह की उड़े वह तो जमीन साथ उड़े; हौसला यह की परवाज से घबराता है.
तेरी तकदीर में आसाइश ए अंजाम नहीं; 
कि तू शोरिश ए आगाज़ से घबराता है.


ना मैं तलाश करूं 
तुम में 
जो नहीं हो तुम 
ना तुम तलाश करो मुझ में 
जो नहीं हूं मैं


यह बात उन दिनों की है 
जब इस ज़मी पर 
इबादत घरों की जरूरत नहीं थी 
मुझी में 
खुद था...!


और तो सब कुछ ठीक है
लेकिन कभी कभी यूँ ही
चलता फिरता शहर, अचानक
तन्हा लगता है...


फासला
चांद बना देता है 
हर पत्थर को 


शहर में सबको कहां मिलती है रोने की जगह अपनी इज्जत भी यहां हँसने हँसाने से रही


मोहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले


हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिसको भी देखना हो कई कई बार देखना


एक पल में हम वहां से उठे 
जहां बैठने में हमें जमाने लगे


अच्छा है दिल के पासवाने रहे अक्ल 
पर कभी-कभी इस तनहा भी छोड़िए

He who wins 
most of the arguments 
has fewest friends

Man is not only responsible for what he does; he is also responsible for what happens to him...
(Lala ji & Daddy)


He who is afraid to ask is ashamed of learning.


Our five senses are incomplete without the sixth one...
'Common Sense'


A Smile is a curve 
which can put 
lot of things 
Straight !


ख़ामोशी भी बा- अंदाज- ए गिला होती है
जरूरी तो नहीं शिकवा होठों से अता हो


We are not chemicle 
We are human
We can think
Before Reaction


क्यूं डरे 
जिन्दगी में 
क्या होगा
कुछ 
ना होगा 
तो 
तजुर्बा होगा


मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को 
खुद से पहले सुला देता हूँ.

हैरत ये है कि हर सुबह
ये मुझसे पहले जाग जाती हैं.

Friday, February 20, 2026

ग्रामोफोन रिकार्ड

ओशो की किसी किताब में पढ़ा था.

मैं तुम्हें तुम्हारा पता नहीं दे सकता
मुझे मेरा पता है 
और कैसे मुझे मेरा पता लगा 
इसकी विधि जरूर तुमसे कह सकता हूं 
कैसे मैने खोदा अपना कुआं 
कैसे पाया अपना जल स्रोत 
उसकी विधि तुमसे कह सकता हूं 
उस विधि को भी जड़ता से मत पकड़ लेना 
नहीं तो चूक हो जाएगी 
यह मामला नाजुक है 
नाजुक इसलिए है कि 
दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते 
दो व्यक्तियों के भीतर का 
नक्शा भी एक जैसा नहीं होता 
लेकिन इशारों को तुम 
नक्शे मत मान लेना 
इस दुनिया में कोई नक्शा नहीं है 
आत्मज्ञान का 
हाँ बहुत लोगों ने- 
बुद्धों ने- इंगित किए हैं
इंगित का अर्थ ही 
यह होता है कि समझो 
फिर समझ पूर्वक 
अपने अनुकूल डालो 
प्रत्येक व्यक्ति को 
अपने धर्म की तलाश करनी होती है 
और जो लोग मानकर बैठ जाते हैं- 
हिंदू मुस्लिम जैन इसाई
वे चूक जाते हैं
वे सोचते हैं कि मिल गई बाइबल 
मिल गया कुरान मिल गए वेद 
अब और क्या करना है 
इनको कंठस्थित 
करें ग्रामोफोन रिकॉर्ड हो जाओगे 
रटंते तोते बन जाओगे
खुद का पता ना मिलेगा...

Friday, April 29, 2022

बुद्धत्व

बुद्धत्व क्या है
किसी का मन, वचन और कर्म से...
सरल
सहज
सजग
हो जाना.

Friday, November 12, 2021

सृष्टि

सृष्टि 
एक चक्र है 
जहां शुरु 
वहीं खत्म है,
और
जहाँ खत्म 
वही शुरू...

Tuesday, May 18, 2021

JAWAHAR 18 JANUARY

दोस्तों में से एक दोस्त की फिजिकल प्रेजेंस कम हो गई। virtually तो वह कभी अलग हो ही नहीं सकता।
19 जनवरी 2020 संडे सुबह काम पर जाने के लिए तैयार हो रहा था। एक टांग पेंट में और दूसरी अंदर जाने की तैयारी में थी, कि फोन घन घना उठा. नजर पड़ी तो कपिल का था. अक्सर इतनी सुबह हम दोस्तों को एक-दूसरे को फोन करने की आदत नहीं है. निशाचर जो ठहरे. आधा अंदर और आधा बाहर वाली स्थिति में ही मोबाइल उठाया.
" मेहता,जवाहर नहीं रहा." कुछ मिनट्स का pause... दूसरी टांग पर ठंड अब ज्यादा महसूस होने लगी थी। पर हाथ थे कि चल ही नहीं रहे थे। यह कुछ चंद लम्हे कई सालों जैसे लंबे महसूस हो रहे थे।
"राजीव का फोन आया था।"
उसने बोला।
कपिल की आवाज किसी रोबोट जैसी संवेदनहीन लग रही थी। यतेंद्र को फोन किया तो उसकी शुरुआत हुई भैनचौ... कोई दोस्त ही ऐसा रिएक्शन दे सकता है। हरीश हमेशा की तरह हम सबसे ज्यादा संयत था। पॉल द ग्रेट हर्ट थे और मणिपुर से अपनी भावना इजहार कर रहे थे।
मुनीश से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था और लवलीन बिल्कुल ब्लैंक थी।
लगातार अपने अपने स्त्रोतों को खंगाला जा रहा था, जो लंदन से हमें सही सिचुएशन बता सके। ऑफिस जाने का मन और हिम्मत दोनों ही नहीं थे। हम सब cricess of recation से गुजर रहे थे। क्या react करें कैसे react करें कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। कोई गालियां दे रहा था, कोई हंस रहा था, कोई बिल्कुल सदमे में था, कोई बिलकुल  चुप तो कोई बहुत बड़बड़ा रहा था। कभी ऐसा भी होगा सोचा ही ना था।
एक दूसरे को दिन भर फोन इसलिए नहीं होते रहे कि कोई जरूरत थी, बल्कि एक दूसरे से बात करके ही हम खुद को समझाने की कोशिश कर रहे थे। दीपा (जवाहर की बहन) से बात करने की हिम्मत ही नहीं हो पा रही थी। राधाकृष्णन,अमिताभ, हिमांशु, प्रियंका इत्यादि इत्यादि सभी से अचानक ही कई सालों के बाद मैसेजिंग चालू हो गई... कड़ी जवाहर ही था।
फेसबुक अपडेट देखकर ऐसे कई फोन आने चालू हुए जिनको मैं जानता ही नहीं था, वह जवाहर के schoolmates या ऑफिस कलीग थे। यह जवाहर का व्यक्तित्व ही था कि जो उससे मिला, हमेशा के लिए उसी का हो गया। हम दोस्तों के बीच का अटल बिहारी यानी आजाद शत्रु था।

ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की बात है- शायद फर्स्ट क्वार्टर की,

हम दोनों डीटीसी की U SPECIAL में थे मैंने पूछा यार कोर्स कैसा चल रहा है? तपाक से जवाब आया कि मैंने तो SYLLABUS पूरा भी कर लिया। एक गजब का CONFIDANCE था साले मे।
और वाकई जवाहर तूने लाइफ का सिलेबस सबसे पहले पूरा किया।
Kasturi Rangan Jawahar
K R Jawahar
02/10/1975 to 18/01/2020

Friday, January 15, 2021

ओस की बूँद

कह देना समन्दर से 
हम ओस के मोती हैं 
दरिया की तरह 
तुमसे मिलने नहीं आएंगे...!

ओस की बूंद से 
बोला समन्दर,

भाप बन जाओगे, 
फिर बरस कर 
मुझ तक ही आओगे।

Wednesday, December 9, 2020

दांव

कभी यूं भी आजमाओ नसीब को अपने 
कि दांव पर लगे हो नकाब सब अपने.